जल एवं पर्यावरण संरक्षण का एसआरएचयू ने दिया राष्ट्रीय पाठ, देशभर के विद्यार्थियों को मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण
हिमकेयर इंटर्नशिप कार्यक्रम में नॉलेज पार्टनर बना विश्वविद्यालय, चंबा में जल संरक्षण और सतत विकास पर कराया फील्ड प्रशिक्षण


डोईवाला।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट ने शिक्षा, शोध और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए हिमकेयर (हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन एवं आपदा-रोधी क्षमता पर शिक्षा) इंटर्नशिप कार्यक्रम में नॉलेज पार्टनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का आयोजन सेंटर फॉर हिमालयन रिसर्च (सीएचआर), इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वूमेन, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस दौरान एसआरएचयू के वाटर एंड सैनिटेशन (वाटसन) विभाग के विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए 18 सदस्यीय छात्र दल को टिहरी के चंबा क्षेत्र का भ्रमण कराते हुए जल संरक्षण, स्वच्छता, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन और सामुदायिक विकास से जुड़े विषयों पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
वाटसन विभाग के नितेश कौशिक ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें व्यावहारिक ज्ञान से समृद्ध करना है। उन्होंने कहा कि एसआरएचयू का वाटसन विभाग वर्षों से जल, स्वच्छता और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिसके कारण विश्वविद्यालय को इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में नॉलेज पार्टनर के रूप में आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों और उनके वैज्ञानिक समाधानों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास में अपनी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए। विश्वविद्यालय ने कहा कि इस पहल से एसआरएचयू की शैक्षणिक एवं शोध क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है और संस्थान भविष्य में भी ज्ञान, नवाचार तथा समाजोपयोगी शोध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।



