जब पूरा गांव खाली हुआ, दो बुजुर्गों का सहारा बनी चमोली पुलिस
पांडुकेश्वर के पटूड़ी गांव में अकेले रह रहे भाई-बहन का जाना हाल, राशन खत्म मिला तो पुलिस ने कराई खाद्य सामग्री की व्यवस्था


चमोली।
पहाड़ के गांवों में कपाट बंद होने के बाद पलायन के चलते अक्सर सन्नाटा पसरा रहता है। पांडुकेश्वर के ग्राम पटूड़ी में भी करीब 70 परिवारों में से अधिकांश लोग लामबगड़ चले गए हैं। ऐसे में गांव में रह रहे 78 वर्षीय हिम्मत सिंह चौहान और उनकी 65 वर्षीय बहन कुमारी पुष्पा के लिए चमोली पुलिस उस समय सहारा बनकर पहुंची, जब उनके घर में राशन तक समाप्त हो चुका था।
दोनों बुजुर्ग भाई-बहन गांव में अलग-अलग रहकर जीवन यापन कर रहे हैं। पुलिस को जब उनके अकेले रहने की जानकारी मिली तो थाना गोविंदघाट से उपनिरीक्षक नवनीत भंडारी और उपनिरीक्षक रुकम सिंह पुलिस टीम के साथ उनका हाल जानने गांव पहुंचे। घर पहुंचने पर पुलिस टीम ने उनकी स्थिति जानी तो पता चला कि घर में राशन पूरी तरह खत्म हो चुका है। कुमारी पुष्पा ने बताया कि वह करीब 10 दिनों से बिना नमक के खाना खाकर किसी तरह गुजारा कर रही थीं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कर्मियों ने तत्काल दोनों बुजुर्गों के लिए राशन और आवश्यक खाद्य सामग्री की व्यवस्था कराई। पुलिस की इस पहल से बुजुर्गों को न केवल भोजन की चिंता से राहत मिली, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी मिला कि गांव के सूने हो जाने के बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई है। पुलिस टीम ने क्षेत्र में जंगली जानवरों की मौजूदगी को देखते हुए दोनों बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने, अनावश्यक रूप से अकेले बाहर न निकलने और किसी भी परेशानी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देने की हिदायत भी दी।
कपाट बंद होने के बाद जब गांव की राहें और घर सूने पड़ जाते हैं, ऐसे समय में चमोली पुलिस की यह पहल मानवीय संवेदना की मिसाल बनी है। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ जरूरतमंद और अकेले बुजुर्गों की सुध लेना पुलिस की सामाजिक जिम्मेदारी के भाव को भी दर्शाता है। स्थानीय स्तर पर पुलिस के इस मानवीय प्रयास की सराहना की जा रही है।



