रिश्वत के आरोपों की जांच के आदेश, एसएसपी को भेजी आदेश की प्रति
ऋषिकेश के मुकदमे में धाराएं हल्की करने के नाम पर कथित लेन-देन का मामला, विशेष न्यायाधीश सतर्कता ने दिए विवेचना के निर्देश


ऋषिकेश।
विशेष न्यायाधीश, सतर्कता सेक्टर (एंटी करप्शन कोर्ट), देहरादून की अदालत ने ऋषिकेश से संबंधित मुकदमा संख्या 181/2026 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 8 के तहत लगाए गए आरोपों की जांच के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने प्रार्थना-पत्र को धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए संबंधित थाना प्रभारी को मुकदमा संख्या 181/2026 की विवेचना में प्रार्थना-पत्र में उल्लेखित तथ्यों को शामिल कर नियमानुसार जांच एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। आदेश की प्रति अग्रिम कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को भी भेजी गई है।
प्रकरण में आरोप है कि एक मुकदमे में धाराएं हल्की कराने के नाम पर तत्कालीन ऋषिकेश कोतवाल कैलाश भट्ट के नाम से कथित रूप से धन लिए जाने की शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता अतुल गुप्ता की ओर से 11 मई 2026 को कुछ व्यक्तियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मूल मुकदमे के वादी दिनेश कोठारी ने न्यायालय का रुख करते हुए अतुल गुप्ता सहित अन्य की भूमिका पर सवाल उठाए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की मांग की। न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच की मांग स्वीकार करते हुए विवेचना के निर्देश दिए हैं।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि वर्तमान विवेचना अधिकारी प्रचलित विधि के अनुसार जांच करने में सक्षम नहीं है तो जांच को नियमानुसार सक्षम उच्च अधिकारी को हस्तांतरित किया जा सकता है। मामले में दिनेश कोठारी की ओर से न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश सेठी ने पैरवी की। न्यायालय के आदेश में लगाए गए आरोपों की जांच किया जाना निर्देशित है आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच के परिणाम के बाद होगा।



