नेटवर्क के अभाव में सीएम हेल्पलाइन भी बनी पहाड़ के लोगों के लिए परेशानी
1905 पर शिकायत दर्ज कराने के लिए घंटों इंतजार, कई बार अधूरी रह जाती है शिकायत; व्हाट्सऐप नंबर जारी करने की मांग


रिखणीखाल।
पर्वतीय क्षेत्रों के दुर्गम गांवों में कमजोर संचार व्यवस्था अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। नेटवर्क बाधित रहने के कारण ग्रामीणों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 पर अपनी शिकायत दर्ज कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर नेटवर्क नहीं मिलने से घंटों इंतजार के बाद भी हेल्पलाइन पर पूरी बात नहीं हो पाती। ऐसे में शिकायत या तो अधूरी दर्ज होती है या फिर दर्ज ही नहीं हो पाती, जिससे दूरदराज के ग्रामीणों की समस्याएं शासन-प्रशासन तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज कई शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं, जबकि कुछ शिकायतों के स्वत: बंद होने की बात भी सामने आती रही है। लोगों का कहना है कि कई मामलों में हेल्पलाइन महज शिकायत दर्ज करने और संबंधित विभाग तक बात पहुंचाने का माध्यम बनकर रह जाती है, जबकि वास्तविक समस्या के समाधान और उसकी जानकारी मिलने को लेकर लोगों को परेशानी होती है। खासकर संचार विहीन और कमजोर नेटवर्क वाले गांवों के लोगों के लिए यह व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।
स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 के साथ संचार विहीन एवं नेटवर्क बाधित क्षेत्रों के लिए विशेष व्हाट्सऐप नंबर जारी किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस माध्यम से लोग अपनी शिकायत लिखित रूप में अथवा संदेश के जरिए आसानी से दर्ज करा सकेंगे और शिकायत के निस्तारण की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। लोगों के अनुसार पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सरल बनाना जरूरी है, तभी सरकार की जनसमस्या निवारण व्यवस्था का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।



