दैवीय आपदा के एक साल बाद भी स्कूल भवन बदहाल, पुनर्निर्माण की मांग
क्षतिग्रस्त भवन में ही चल रहे दो विद्यालय, बच्चों की सुरक्षा और पठन-पाठन को लेकर बढ़ी चिंता


नरेंद्रनगर।
दैवीय आपदा के करीब एक वर्ष बाद भी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डौंर और राजकीय प्राथमिक विद्यालय डौंर के क्षतिग्रस्त भवन की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है। दोनों विद्यालय वर्ष 2011 से राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डौंर के भवन में संचालित हो रहे हैं। भवन की जर्जर स्थिति के बीच छात्र-छात्राओं की पढ़ाई जारी है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने को लेकर चिंता बनी हुई है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक मनोज भंडारी और प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक मनमोहन रागड़ ने बताया कि 5 सितंबर 2025 को आई दैवीय आपदा में विद्यालय भवन, रसोईघर, खेल प्रांगण और विद्यालय की आवश्यक सामग्री को नुकसान पहुंचा था। इसकी सूचना जिला आपदा प्रबंधन टिहरी-गढ़वाल, उप शिक्षा अधिकारी नरेंद्रनगर, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) और जिलाधिकारी टिहरी-गढ़वाल को दी गई थी। तहसील नरेंद्रनगर की ओर से भी क्षति की रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन समिति को भेजी गई, लेकिन करीब एक वर्ष बीतने के बावजूद भवन के पुनर्निर्माण या मरम्मत को लेकर धरातल पर ठोस पहल नहीं हो सकी है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य राकेश मोहन जुयाल ने बताया कि क्षतिग्रस्त भवन के कारण पठन-पाठन के साथ मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में भी दिक्कतें आ रही हैं। विद्यालय भवन का उपयोग मतदान केंद्र के रूप में भी किया जाता है। ऐसे में विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विद्यालय से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेते हुए क्षतिग्रस्त भवन का शीघ्र पुनर्निर्माण कराने, रसोईघर एवं खेल प्रांगण को सुरक्षित करने तथा बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है।



