डिजिटल युग में भी ज्ञान के संरक्षण का सशक्त माध्यम हैं पुस्तकालय
एसआरएचयू में तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी शुरू, पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर हुआ मंथन


डोईवाला।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। सेंटर फॉर लाइब्रेरी एंड मैनेजमेंट सिस्टम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, शोध और ज्ञान के प्रसार में पुस्तकालयों की भूमिका पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया गया।
आदि कैलाश सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसआरएचयू के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि डिजिटल युग में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद पुस्तकालय ज्ञान के संरक्षण और प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं। रंगनाथन स्मृति व्याख्यान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. उमा कांजीलाल ने पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एसआर रंगनाथन के योगदान और उनके सिद्धांतों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में पुस्तकालय केवल पुस्तकों के संग्रह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विश्वसनीय एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ शिक्षण, शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।
डॉ. उमा कांजीलाल ने कहा कि डिजिटल संसाधनों, ऑनलाइन सूचनाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में पुस्तकालयाध्यक्षों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। पुस्तकालयों को विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को सूचना के सही उपयोग के लिए सक्षम बनाने की दिशा में भी कार्य करना होगा। इससे पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष एवं समन्वयक डॉ. योगेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एनवी सत्यनारायण, प्रति कुलपति डॉ. एके देवरारी, महानिदेशक शैक्षणिक विकास डॉ. विजेंद्र चौहान सहित अन्य मौजूद रहे। पुस्तक प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों से संबंधित पुस्तकों एवं शैक्षणिक संसाधनों को प्रदर्शित किया गया।



