जन्म के पहले घंटे में मां का दूध शिशु के स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव
एम्स ऋषिकेश में विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम, सामाजिक सोच में बदलाव पर जोर


ऋषिकेश।
एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिशु के स्वास्थ्य और शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जन्म के पहले घंटे में स्तनपान तथा शुरुआती छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने के महत्व पर जोर दिया गया। मुख्य अतिथि एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने कहा कि मां का पहला गाढ़ा दूध शिशु के लिए प्राकृतिक टीके का काम करता है। उन्होंने कहा कि स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए केवल माताओं ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को जागरूक करना जरूरी है, ताकि कामकाजी माताओं को भी सहयोग मिल सके।
डीन (शैक्षणिक) प्रो. (डॉ.) सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि इस संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में चिकित्सा विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वर्तिका सक्सेना ने बताया कि संस्थागत प्रसव की दर 80 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद जागरूकता की कमी के कारण करीब 40 प्रतिशत माताएं ही जन्म के पहले घंटे में स्तनपान करा पाती हैं। इस अंतर को कम करने के लिए व्यापक जनजागरूकता जरूरी है।
‘काम भी, मां भी’ पहल के तहत सप्ताह का समापन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रायवाला में हुआ, जहां इंटर्न चिकित्सकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का संदेश दिया। पति की भूमिका पर भी चर्चा की गई और उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।



