सरकारी स्कूलों से मोहभंग की वजह शिक्षा का गिरता स्तर और बढ़ता बाजारीकरण : राकेश राणा
कांग्रेस महासचिव ने कहा—शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर पढ़ाई पर दिया जाए पूरा ध्यान


नई टिहरी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश राणा ने सरकारी विद्यालयों से छात्रों और अभिभावकों के बढ़ते मोहभंग पर चिंता जताते हुए इसके लिए शिक्षा के गिरते स्तर और बढ़ते बाजारीकरण को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय निजीकरण और बाजार को बढ़ावा दिया गया, जिसका सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है।
राणा ने कहा कि शिक्षा व्यापार नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे का अधिकार और समाज के भविष्य की नींव है। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के साथ ही उन्हें चुनाव ड्यूटी, सर्वेक्षण, पंजीकरण और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री युवा मंथन’, ‘परीक्षा पे चर्चा’ और ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी के लिए विद्यालयों पर बनाए जाने वाले दबाव पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने सरकार से सरकारी विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति करने, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने और शिक्षा के बाजारीकरण पर रोक लगाने की मांग की। राणा ने कहा कि बच्चों को सरकारी योजनाओं का प्रचार नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहिए और शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं, पढ़ाने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए।



