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ऋषिकेश से यूरोप तक आयुर्वेद की वैश्विक यात्रा

डॉ. डी.के. श्रीवास्तव नीदरलैंड्स, बेल्जियम और स्विट्जरलैंड में करेंगे आयुर्वेद कार्यशाला व नाड़ी परीक्षण कार्यक्रम

ऋषिकेश।

आयुर्वेद की प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से नवजीवनम् आयुर्वेद इंस्टीट्यूट्स, ऋषिकेश के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. डी.के. श्रीवास्तव 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक यूरोप के नीदरलैंड्स, बेल्जियम और स्विट्जरलैंड में आयुर्वेद वेलनेस कार्यशालाओं, व्याख्यान, परामर्श एवं उपचार संबंधी कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उन्हें यूरोपियन एजुकेशन फॉर आयुर्वेदा की ओर से इन कार्यक्रमों के लिए आमंत्रित किया गया है। इसे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बताया गया है।

करीब 30 वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा एवं वेलनेस के क्षेत्र में कार्य कर रहे डॉ. श्रीवास्तव अब तक 16 से अधिक देशों में कार्यशालाओं और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार कर चुके हैं। वे वर्ष 2008 से यूरोपियन एजुकेशन फॉर आयुर्वेदा के सदस्य हैं और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं।

नीदरलैंड्स और बेल्जियम के जेंट, जीलैंड तथा ब्राबांट क्षेत्रों में आयुर्वेद वेलनेस एवं उपचार संबंधी कार्यक्रम होंगे। स्विट्जरलैंड में 6 से 14 अक्टूबर तक विशेष कार्यशाला, व्याख्यान एवं नाड़ी परीक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित है। इनमें पारंपरिक नाड़ी परीक्षण, आयुर्वेदिक जीवनशैली, प्राकृतिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन तथा शरीर और मन के समग्र स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोग उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की समग्र भारतीय जीवन-दृष्टि है। यूरोप यात्रा का संदेश “मन को सुधारें, शरीर को पुनर्जीवित करें और आत्मा को नई ऊर्जा दें” रखा गया है। नवजीवनम् आयुर्वेद इंस्टीट्यूट्स का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वभर तक पहुंचाना है।एक छोटा संपादकीय सुझाव: शीर्षक में “वैश्विक यात्रा” अच्छा प्रभाव देता है, लेकिन खबर का सबसे मजबूत समाचार-बिंदु “ऋषिकेश के आयुर्वेद विशेषज्ञ को यूरोप में आमंत्रण” है। अगर आप चाहें तो इसी आधार पर इससे भी ज्यादा अखबारी और आकर्षक 2-3 शीर्षक बना सकता हूँ।

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