बंजर खेतों में खिला आत्मनिर्भरता का सपना, 200 सेब के पेड़ों के बाद अब 5 हजार पौधों का लक्ष्य
क्यारी नगुण के रामलाल नौटियाल ने शुरू की सेब की बागवानी, युवाओं को पहाड़ लौटने से पहले शोध और आर्थिक तैयारी की दी सलाह


नई टिहरी।
पलायन के कारण बंजर हो रही पहाड़ की जमीन को फिर से रोजगार का आधार बनाने की कोशिश कर रहे थौलधार ब्लॉक के क्यारी नगुण निवासी रामलाल नौटियाल उर्फ ‘लब्बू’ ने सेब की बागवानी को स्वरोजगार का माध्यम बनाया है। पैतृक भूमि पर करीब 200 सेब के पेड़ों की देखभाल कर रहे रामलाल अब इसे विस्तार देते हुए 5 हजार पौधे लगाने की तैयारी में जुटे हैं।
रामलाल ने उद्यान विभाग से जानकारी और मार्गदर्शन लेकर लंबे समय से बंजर पड़ी जमीन पर सेब के पौधे लगाए। पिता कुलानंद नौटियाल सहित परिवार के सदस्यों ने खेत तैयार करने, गड्ढे खोदने और पौधरोपण में उनका सहयोग किया। उनका कहना है कि पहाड़ के युवाओं को अपनी जमीन और स्थानीय संसाधनों को बोझ नहीं, बल्कि रोजगार के अवसर के रूप में देखना चाहिए। हालांकि उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि केवल सब्सिडी के भरोसे पहाड़ लौटने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों, बाजार और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी लेने के साथ आर्थिक तैयारी भी जरूरी है।

नगर पंचायत कीर्तिनगर के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके रामलाल का मानना है कि पहाड़ में बागवानी आसान नहीं है और यहां हर कदम पर संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने युवाओं को कम से कम पांच साल का आर्थिक बैकअप तैयार करने के बाद ही ऐसे प्रयास शुरू करने की सलाह दी। अब उनका लक्ष्य 5 हजार सेब के पौधों का बाग तैयार करना है। उनका प्रयास सफल हुआ तो यह क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी बागवानी के जरिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल सकता है।



